जब वोह ज़िंदा था
जब वोह ज़िंदा था, इन सब की वजह से शर्मिंदा था,
बीवी के लिए छोड़ गया सफेद साड़ी और बच्चों के लिए गाड़ी |
आज उसकी लाश को देख वोह रो पड़े,
पिछली रात जब वोह ज़िंदा था तो उसके गले पड़े |
कर लो फ़ैसला तुम सच में कौन हो,
अब तुम सब क्यों मौन हो !
नवीन गिरी -(सब कुछ नाटक है !)

